प्रस्तुत है एक और कृष्ण भजन जिसे आप लय में सस्वर तथा ढ़ोलक आदि पर भी गा कर किसी भी उत्सव या गीत-संध्या, जागरण या कीर्तन में रंग जमा सकते हैँ. यह भजन कृष्ण विरह का भजन है जिसमें कृष्ण के मथुरा चले जाने पर उनकी याद में माँ यशोदा, गोप-ग्वालों, गोपियों और राधा तथा गायों की व्याकुलता को दर्शाता है. तो प्रस्तुत है आप के लिए जन्माष्टमी के अवसर पर.. कृष्ण भजन- भोली यशोदा लुट गई रे कन्हाई तेरे प्यार में Krishna Ka Mathura gaman
जीवन में कठिनाइयां किस पर नहीं पड़ती, पीड़ा सब को झेलनी पड़ती है किन्तु एक रचनाकार या कवि अपनी पीड़ा को कला या कविता में ढाल लेता है . अपने दुःख को कविता या सृजन में बदलने की कला ही किसी भी रचनाकार की ताकत होती है जो मुसीबतों में भी उसे टूटने नहीं देती. जीवन की विषमतायें एक रचनाकार के लिये खुराक के समान होती है जिन्हें अपने सृजन में ढ़ाल वह अपनी रचना को कालजयी बनाता है. यह लेख भी पढ़ें - क्या आपको भी अपना जीवन कठिन लगता है? कैसे बनाये जीवन को आसान यह हिंदी कविता ' कांटों का जंगल' मैंने अपने ऐसे ही अनुभवों के आधार पर लिखी है। आप भले ही कवि ना हो पर यदि कविता को समझते हो तो आपको मेरी बात में सत्यता अवश्य महसूस होगी.