दौराहा ब्लाग पत्रिका गृह-स्वामिनी पर काव्य के अन्तर्गत आज के मानव की मनोस्थिति को व्यक्त करती एक और कविता .... हर किसी के मन में ना जाने कितने ही दौराहे होते हैं जहाँ वह द्वंद में पड़ जाता है कि कौन सा रास्ता सही है और कौन सा रास्ता गलत. मन के अन्तर्द्वन्द को दर्शाती एक कविता .....
जीवन में कठिनाइयां किस पर नहीं पड़ती, पीड़ा सब को झेलनी पड़ती है किन्तु एक रचनाकार या कवि अपनी पीड़ा को कला या कविता में ढाल लेता है . अपने दुःख को कविता या सृजन में बदलने की कला ही किसी भी रचनाकार की ताकत होती है जो मुसीबतों में भी उसे टूटने नहीं देती. जीवन की विषमतायें एक रचनाकार के लिये खुराक के समान होती है जिन्हें अपने सृजन में ढ़ाल वह अपनी रचना को कालजयी बनाता है. यह लेख भी पढ़ें - क्या आपको भी अपना जीवन कठिन लगता है? कैसे बनाये जीवन को आसान यह हिंदी कविता ' कांटों का जंगल' मैंने अपने ऐसे ही अनुभवों के आधार पर लिखी है। आप भले ही कवि ना हो पर यदि कविता को समझते हो तो आपको मेरी बात में सत्यता अवश्य महसूस होगी.