कवि का हृदय भी ना जाने कहाँ कहाँ कुलाँचे भरता रहता है. कभी वह दार्शनिक बन जीवन की निस्सारता और सारता पर मनन करने लगता है तो अगले ही पल जीवन उसे एक उत्सव की तरह प्रतीत होने लगता है. कभी रूदन कभी हास, कभी विश्वास कभी विश्वासघात, कभी निराशा कभी आशा सभी विरोधाभास उसके अपने है. सभी के दुख सुख उसके मन को मथते हैं. सभी की अनुभूतियों को कवि अपने मन में समेट कर कविता रचता है. इसी सच्चाई को सार्थक करती दार्शनिक भावभूमि से उपजी जीवन में नीहित विरोधाभास पर मेरी (अर्थात अन्जु अग्रवाल की) एक मौलिक दार्शनिक कविता ...... विरोधाभास
जीवन में कठिनाइयां किस पर नहीं पड़ती, पीड़ा सब को झेलनी पड़ती है किन्तु एक रचनाकार या कवि अपनी पीड़ा को कला या कविता में ढाल लेता है . अपने दुःख को कविता या सृजन में बदलने की कला ही किसी भी रचनाकार की ताकत होती है जो मुसीबतों में भी उसे टूटने नहीं देती. जीवन की विषमतायें एक रचनाकार के लिये खुराक के समान होती है जिन्हें अपने सृजन में ढ़ाल वह अपनी रचना को कालजयी बनाता है. यह लेख भी पढ़ें - क्या आपको भी अपना जीवन कठिन लगता है? कैसे बनाये जीवन को आसान यह हिंदी कविता ' कांटों का जंगल' मैंने अपने ऐसे ही अनुभवों के आधार पर लिखी है। आप भले ही कवि ना हो पर यदि कविता को समझते हो तो आपको मेरी बात में सत्यता अवश्य महसूस होगी.