प्रेमी की उपेक्षा से आहत प्रेमिका के मनोभावो को प्रदर्शित करती - A Long Love Poetry In Hindi 'किनारा' नारी का मन जितना कोमल होता है, उतनी ही वह महान भी होती है. किन्तु प्रेमी के प्रति उसका प्रेम कम नहीं होता और उसके मन में यही आस जगी रहती है कि उसका प्रेमी लौटकर उसके पास अवश्य आएगा. तो प्रस्तुत है प्रेयसी के त्यागपूर्ण और महान प्रेम की नदी के किनारे से प्रतीकात्मक तुलना करती हुई- एक लंबी हिंदी प्रेम कविता- 'किनारा' Love Poem- 'Kinara' तुम अपने आज में मशगूल हो और मेरे पास तुम्हारा कल सुरक्षित है तुम्हारे लिए तुम्हारा अतीत व्यर्थ की वस्तु है, मगर मेरा भूत, मेरा वर्तमान और मेरा भविष्य तुम्हारे उस कल को ही समर्पित है कभी तुमने मुझसे कहा था तुम मेरा किनारा हो तुम ही मेरा जीवन तुम ही सहारा हो और तब से मैं किनारा बन खड़ी हूं, मगर तुम नदी बन बह गए ढूंढ लिए तुमने नए किनारे, किंतु मेरे सब सहारे ढ़ह गए सच ही है भला किनारे क्या कभी बहती धारा को रोक पाए हैं जल के आवेग के सम्मुख वो सदा ही डूबे डुबाये हैं मैं खड़ी हूं ...
जीवन में कठिनाइयां किस पर नहीं पड़ती, पीड़ा सब को झेलनी पड़ती है किन्तु एक रचनाकार या कवि अपनी पीड़ा को कला या कविता में ढाल लेता है . अपने दुःख को कविता या सृजन में बदलने की कला ही किसी भी रचनाकार की ताकत होती है जो मुसीबतों में भी उसे टूटने नहीं देती. जीवन की विषमतायें एक रचनाकार के लिये खुराक के समान होती है जिन्हें अपने सृजन में ढ़ाल वह अपनी रचना को कालजयी बनाता है. यह लेख भी पढ़ें - क्या आपको भी अपना जीवन कठिन लगता है? कैसे बनाये जीवन को आसान यह हिंदी कविता ' कांटों का जंगल' मैंने अपने ऐसे ही अनुभवों के आधार पर लिखी है। आप भले ही कवि ना हो पर यदि कविता को समझते हो तो आपको मेरी बात में सत्यता अवश्य महसूस होगी.