अंग्रेज हमारे देश से चले गये मगर हम भारतीयों के मन से अंग्रेजियत और पश्चिमी संस्कृति के प्रति मोह नहीं गया. इसी विषय पर प्रस्तुत है एक कविता.. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर एक लेख भी पढ़ें लाल बहादुर शास्त्रीजी पर कविता पढ़ें आज अपनी जमीं है, अपना आसमाँ तिरंगा प्यारा आज अपनी जमीं है, अपना आसमाँ मगर ऐ खुदा, ढूँढते थे जो हम जो, वो जहाँ कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है, कहाँ
जीवन में कठिनाइयां किस पर नहीं पड़ती, पीड़ा सब को झेलनी पड़ती है किन्तु एक रचनाकार या कवि अपनी पीड़ा को कला या कविता में ढाल लेता है . अपने दुःख को कविता या सृजन में बदलने की कला ही किसी भी रचनाकार की ताकत होती है जो मुसीबतों में भी उसे टूटने नहीं देती. जीवन की विषमतायें एक रचनाकार के लिये खुराक के समान होती है जिन्हें अपने सृजन में ढ़ाल वह अपनी रचना को कालजयी बनाता है. यह लेख भी पढ़ें - क्या आपको भी अपना जीवन कठिन लगता है? कैसे बनाये जीवन को आसान यह हिंदी कविता ' कांटों का जंगल' मैंने अपने ऐसे ही अनुभवों के आधार पर लिखी है। आप भले ही कवि ना हो पर यदि कविता को समझते हो तो आपको मेरी बात में सत्यता अवश्य महसूस होगी.