कम पंक्तियों में ही बड़ी बात, एक पूरा फलसफा बयान करने में सक्षम होती है. ऐसी बात जो व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दे. लघु कथा ' जिंदगी और मैं ' भी कुछ ऐसी ही लघुकथा है ऐसी ही एक लघुकथा प्रस्तुत है.. जिंदगी और मैं एक दार्शनिक विचार लघुकथा " जिंदगी और मैं " के रूप में ... जिंदगी और मैं
जीवन में कठिनाइयां किस पर नहीं पड़ती, पीड़ा सब को झेलनी पड़ती है किन्तु एक रचनाकार या कवि अपनी पीड़ा को कला या कविता में ढाल लेता है . अपने दुःख को कविता या सृजन में बदलने की कला ही किसी भी रचनाकार की ताकत होती है जो मुसीबतों में भी उसे टूटने नहीं देती. जीवन की विषमतायें एक रचनाकार के लिये खुराक के समान होती है जिन्हें अपने सृजन में ढ़ाल वह अपनी रचना को कालजयी बनाता है. यह लेख भी पढ़ें - क्या आपको भी अपना जीवन कठिन लगता है? कैसे बनाये जीवन को आसान यह हिंदी कविता ' कांटों का जंगल' मैंने अपने ऐसे ही अनुभवों के आधार पर लिखी है। आप भले ही कवि ना हो पर यदि कविता को समझते हो तो आपको मेरी बात में सत्यता अवश्य महसूस होगी.