एक बाल प्रार्थना ' भगवन हमें सुबुद्धि देना ' जिसमें बच्चे भगवान से सुबुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना कर रहे हैं.... बाल - मन बड़ा कोमल, निर्दोष और पवित्र होता है. हमारी भारतीय संस्कृति में बचपन से ही घर पर और स्कूल आदि में बच्चों को प्रार्थना करना सिखाया जाता जिसमे बच्चे ईश्वर से उन्हें सबुद्धि और शक्ति तथा समस्त सद्गुणों को प्रदान करने की प्रार्थना करते है. बचपन ही ऐसी अवस्था होती है जब बच्चे हर छल-कपट और भौतिकता से दूर होते है. उनका निर्दोष स्वच्छ मन सुसंस्कारों को धारण करने की क्षमता रखता है. कच्ची मिटटी की तरह उन्हें जैसा ढालना चाहे हम ढाल सकते है. घर व स्कूल आदि में सिखायी जाने वाल बाल-प्रार्थनाएँ यह भूमिका बहुत अच्छी तरह निभाती है. मां पर एक बाल कविता पढें- मां की बस यही परिभाषा गृह-स्वामिनी पर बच्चों के लिए ऐसी ही एक बाल प्रार्थना बाल कविता के रूप में.. भगवन हमें सुबुद्धि देना छोटे बच्चों के हृदय में ईश्वर निवास करता है. इसीलिए ईश्वर मासूम बालकों के हृदय की पुकार को अवश्य सुन...
जीवन में कठिनाइयां किस पर नहीं पड़ती, पीड़ा सब को झेलनी पड़ती है किन्तु एक रचनाकार या कवि अपनी पीड़ा को कला या कविता में ढाल लेता है . अपने दुःख को कविता या सृजन में बदलने की कला ही किसी भी रचनाकार की ताकत होती है जो मुसीबतों में भी उसे टूटने नहीं देती. जीवन की विषमतायें एक रचनाकार के लिये खुराक के समान होती है जिन्हें अपने सृजन में ढ़ाल वह अपनी रचना को कालजयी बनाता है. यह लेख भी पढ़ें - क्या आपको भी अपना जीवन कठिन लगता है? कैसे बनाये जीवन को आसान यह हिंदी कविता ' कांटों का जंगल' मैंने अपने ऐसे ही अनुभवों के आधार पर लिखी है। आप भले ही कवि ना हो पर यदि कविता को समझते हो तो आपको मेरी बात में सत्यता अवश्य महसूस होगी.