कृष्ण भजन- हँस हँस के मोहे रिझाये गयो रे

हँस हँस के मोहे रिझाये गयो रे

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Radha-krishna
कृष्ण एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम है जो स्वयं में सम्पूर्ण है. हमारे इतिहास में, हमारी संस्कृति में, हमारे पुराणों में सोलह कलाओं से परिपूर्ण श्रीकृष्ण को परमात्मा का अवतार माना जाता है.
उनकी लीलाएं विलक्षण हैं. कहा जाता है कि उनकी हर लीला के पीछे कोई ना कोई उद्देश्य नीहित था. उनके मोहक रूप की गोपियां दिवानी हैं. उनकी सुन्दर छवि राधा के मन-मन्दिर में बसी रहती है. लीलाधर कृष्ण की रासलीलाएं, उनकी वाक्पटुता, उनका नटखट छलिया रूप हर किसी को अलौकिक आनन्द का रसास्वादन करा उनका दीवाना बना देता है. 
गीतों की पालकी
ऐसे रस-परिपूर्ण भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस जन्माष्टमी पर प्रस्तुत है उनकी लीलाओं को चरितार्थ करता एक भजन जिस में कृष्ण राधा की नोकझोंक का वर्णन किया गया है. इस कृष्ण भजन को पढ़ कर और गा कर आप भी डूब जाइये भक्ति रस  में...... 
लीलाधर-कृष्ण
 सर्वप्रिय लीलाधर कृष्ण 
हँस के हँस के मोहे,वह रिझाये गयो रे
कौन मन की नगरिया में आए गयो रे
मन के पट कान्हा, हम नहीं खोलेंगे
तुमसे छलिया ना,अब हम बोलेंगे
छीन के रख लूँगी, मोहन, मुरलिया
जोड़ हाथ कान्हा, आगे-पीछे डोलेंगे
सुख-चैना में रोड़ा, अटकाये गयो रे
कलुआ सताये गयो रे
कौन मन की नगरिया में आये गयो रे.
हम तो मीत तेरे, प्यारी-प्यारी सी राधा
हम से तुमको है, बोलो तो, कैसी बाधा
दरश तिहारे को, पनघट पे आये
प्रेम से अपने यूँ, क्यों हमको बांधा 
जन्माष्टमी पर कृष्ण राधा की झांकी
जन्माष्टमी पर कृष्ण राधा की झांकी 

बतियां कैसी मीठी, बतलाये गयो रे
मक्खन लगाये गयो रे
कौन मन की नगरिया में आये गयो रे.
करे है जादूगरी, बातों का जादूगर
मोह ले दिलों को वो, दिल का सौदागर
इत्ता सताये फिर, भी ना जाये मन से
कैसा है नटखट, छोरा ये बाजीगर


फोड़ गागर दधि, बिखराये गयो रे
मुख पे लिपटाये गयो रे
कौन मन की नगरिया में आये गयो रे.
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